Surah सूरा अल्-वाक़िआ़ - Al-Wāqi‘ah

Hinid Translation96 Aya count
A
This page contains the Arabic text, audio recitation, and Hinid translation of Surah सूरा अल्-वाक़िआ़ - Al-Wāqi‘ah.
إِذَا وَقَعَتِ ٱلۡوَاقِعَةُ ﴿١﴾
जब घटित होने वाली घटित हो जाएगी।(1)
Tafseer:
لَیۡسَ لِوَقۡعَتِهَا كَاذِبَةٌ ﴿٢﴾
उसके घटित होने में कोई झूठ नहीं।(2)
Tafseer:
خَافِضَةࣱ رَّافِعَةٌ ﴿٣﴾
नीचे करने वाली, ऊपर उठाने वाली।[1]
1. इससे अभिप्राय प्रलय है। जो सत्य के विरोधियों को नीचा करके नरक तक पहुँचाएगी। तथा आज्ञाकारियों को स्वर्ग के ऊँचे स्थान तक पहुँचाएगी। आरंभिक आयतों में प्रलय के होने की चर्चा, फिर उस दिन लोगों के तीन भागों में विभाजित होने का वर्णन किया गया है।
(3)
Tafseer:
إِذَا رُجَّتِ ٱلۡأَرۡضُ رَجࣰّا ﴿٤﴾
जब धरती तेज़ी से हिलाई जाएगी।(4)
Tafseer:
وَبُسَّتِ ٱلۡجِبَالُ بَسࣰّا ﴿٥﴾
और पर्वत ख़ूब चूर्ण-विचूर्ण कर दिए जाएँगे।(5)
Tafseer:
فَكَانَتۡ هَبَاۤءࣰ مُّنۢبَثࣰّا ﴿٦﴾
तो वे बिखरी हुई धूल हो जाएँगे।(6)
Tafseer:
وَكُنتُمۡ أَزۡوَ ٰ⁠جࣰا ثَلَـٰثَةࣰ ﴿٧﴾
और तुम तीन प्रकार के लोग हो जाओगे।(7)
Tafseer:
فَأَصۡحَـٰبُ ٱلۡمَیۡمَنَةِ مَاۤ أَصۡحَـٰبُ ٱلۡمَیۡمَنَةِ ﴿٨﴾
तो दाहिने हाथ वाले, क्या ही अच्छे हैं दाहिने हाथ वाले![2]
2. दाहिने हाथ वाले से अभिप्राय वे लोग हैं जिनका कर्मपत्र दाहिने हाथ में दिया जाएगा। तथा बाएँ हाथ वाले वे दुराचारी होंगे जिनका कर्मपत्र बाएँ हाथ में दिया जाएगा।
(8)
Tafseer:
وَأَصۡحَـٰبُ ٱلۡمَشۡـَٔمَةِ مَاۤ أَصۡحَـٰبُ ٱلۡمَشۡـَٔمَةِ ﴿٩﴾
और बाएँ हाथ वाले, क्या बुरे हैं बाएँ हाथ वाले!(9)
Tafseer:
وَٱلسَّـٰبِقُونَ ٱلسَّـٰبِقُونَ ﴿١٠﴾
और जो पहल करने वाले हैं, वही आगे बढ़ने वाले हैं।(10)
Tafseer:
أُوْلَـٰۤىِٕكَ ٱلۡمُقَرَّبُونَ ﴿١١﴾
यही लोग निकट किए हुए हैं।[3]
3. अर्थात अल्लाह के प्रियवर और उसके समीप होंगे।
(11)
Tafseer:
فِی جَنَّـٰتِ ٱلنَّعِیمِ ﴿١٢﴾
नेमत के बाग़ों में।(12)
Tafseer:
ثُلَّةࣱ مِّنَ ٱلۡأَوَّلِینَ ﴿١٣﴾
पहले लोगों में से एक बहुत बड़ा समूह।(13)
Tafseer:
وَقَلِیلࣱ مِّنَ ٱلۡـَٔاخِرِینَ ﴿١٤﴾
तथा थोड़े-से पिछले लोगों में से होंगे।(14)
Tafseer:
عَلَىٰ سُرُرࣲ مَّوۡضُونَةࣲ ﴿١٥﴾
सोने के तारों से बुने हुए तख़्तों पर।(15)
Tafseer:
مُّتَّكِـِٔینَ عَلَیۡهَا مُتَقَـٰبِلِینَ ﴿١٦﴾
उनपर तकिया लगाए आमने-सामने बैठे होंगे।(16)
Tafseer:
یَطُوفُ عَلَیۡهِمۡ وِلۡدَ ٰ⁠نࣱ مُّخَلَّدُونَ ﴿١٧﴾
उनके आस-पास (सेवा के लिए) ऐसे बालक फिर रहे होंगे, जो सदा (बालक) ही रहेंगे।(17)
Tafseer:
بِأَكۡوَابࣲ وَأَبَارِیقَ وَكَأۡسࣲ مِّن مَّعِینࣲ ﴿١٨﴾
ऐसे प्याले َऔर सुराहियाँ और छलकते जाम लेकर जो बहती शराब की होंगे।(18)
Tafseer:
لَّا یُصَدَّعُونَ عَنۡهَا وَلَا یُنزِفُونَ ﴿١٩﴾
वे न उससे सिरदर्द से पीड़ित होंगे और न ही उनकी बुद्धि प्रभावित होगी।(19)
Tafseer:
وَفَـٰكِهَةࣲ مِّمَّا یَتَخَیَّرُونَ ﴿٢٠﴾
तथा ऐसे फल लेकर जिन्हें वे पसंद करते हैं।(20)
Tafseer:
وَلَحۡمِ طَیۡرࣲ مِّمَّا یَشۡتَهُونَ ﴿٢١﴾
तथा पक्षियों का मांस लेकर जिसकी वे इच्छा रखते हैं।(21)
Tafseer:
وَحُورٌ عِینࣱ ﴿٢٢﴾
और बड़ी-बड़ी नैनों वाली गोरियाँ होंगी।(22)
Tafseer:
كَأَمۡثَـٰلِ ٱللُّؤۡلُوِٕ ٱلۡمَكۡنُونِ ﴿٢٣﴾
छिपाकर रखे हुए मोतियों के समान।(23)
Tafseer:
جَزَاۤءَۢ بِمَا كَانُواْ یَعۡمَلُونَ ﴿٢٤﴾
उसके बदले में जो वे (संसार में) किया करते थे।(24)
Tafseer:
لَا یَسۡمَعُونَ فِیهَا لَغۡوࣰا وَلَا تَأۡثِیمًا ﴿٢٥﴾
वे उस में न कोई व्यर्थ बात सुनेंगे और न पाप की बात।(25)
Tafseer:
إِلَّا قِیلࣰا سَلَـٰمࣰا سَلَـٰمࣰا ﴿٢٦﴾
केवल सलाम ही सलाम की आवाज़ होगी।(26)
Tafseer:
وَأَصۡحَـٰبُ ٱلۡیَمِینِ مَاۤ أَصۡحَـٰبُ ٱلۡیَمِینِ ﴿٢٧﴾
और दाहिने हाथ वाले, क्या ही अच्छे हैं दाहिने हाथ वाले!(27)
Tafseer:
فِی سِدۡرࣲ مَّخۡضُودࣲ ﴿٢٨﴾
वे बिना कँटीले बेरियों में होंगे।(28)
Tafseer:
وَطَلۡحࣲ مَّنضُودࣲ ﴿٢٩﴾
तथा परत-दर-परत लगे हुए केलों में।(29)
Tafseer:
وَظِلࣲّ مَّمۡدُودࣲ ﴿٣٠﴾
और ऐसी छाया में जो अच्छी तरह फैली हुई है।[4]
4. ह़दीस में है कि स्वर्ग में एक वृक्ष है जिसकी छाया में सवार सौ वर्ष चलेगा फिर भी वह समाप्त नहीं होगी। (सह़ीह़ बुख़ारी : 4881)
(30)
Tafseer:
وَمَاۤءࣲ مَّسۡكُوبࣲ ﴿٣١﴾
और प्रवाहित जल में।(31)
Tafseer:
وَفَـٰكِهَةࣲ كَثِیرَةࣲ ﴿٣٢﴾
तथा बहुत अधिक फलों में।(32)
Tafseer:
لَّا مَقۡطُوعَةࣲ وَلَا مَمۡنُوعَةࣲ ﴿٣٣﴾
जो न कभी समाप्त होंगे और न उनसे कोई रोक-टोक होगी।(33)
Tafseer:
وَفُرُشࣲ مَّرۡفُوعَةٍ ﴿٣٤﴾
और ऊँचे बिस्तरों पर होंगे।(34)
Tafseer:
إِنَّاۤ أَنشَأۡنَـٰهُنَّ إِنشَاۤءࣰ ﴿٣٥﴾
निःसंदेह हमने उनको एक विशेष रूप से पैदा किया है।(35)
Tafseer:
فَجَعَلۡنَـٰهُنَّ أَبۡكَارًا ﴿٣٦﴾
तो हमने उन्हें कुँवारियाँ बनाया है।(36)
Tafseer:
عُرُبًا أَتۡرَابࣰا ﴿٣٧﴾
जो पतियों को प्रिय और समान आयु वाली हैं।(37)
Tafseer:
لِّأَصۡحَـٰبِ ٱلۡیَمِینِ ﴿٣٨﴾
दाहिने हाथ वालों के लिए।(38)
Tafseer:
ثُلَّةࣱ مِّنَ ٱلۡأَوَّلِینَ ﴿٣٩﴾
एक बड़ा समूह पहले लोगों में से हैं।(39)
Tafseer:
وَثُلَّةࣱ مِّنَ ٱلۡـَٔاخِرِینَ ﴿٤٠﴾
तथा एक बड़ा समूह पिछले लोगों में से हैं।(40)
Tafseer:
وَأَصۡحَـٰبُ ٱلشِّمَالِ مَاۤ أَصۡحَـٰبُ ٱلشِّمَالِ ﴿٤١﴾
और बाएँ हाथ वाले, क्या ही बुरे हैं बाएँ हाथ वाले!(41)
Tafseer:
فِی سَمُومࣲ وَحَمِیمࣲ ﴿٤٢﴾
(वे) गर्म हवा तथा खौलते जल में होंगे।(42)
Tafseer:
وَظِلࣲّ مِّن یَحۡمُومࣲ ﴿٤٣﴾
और काले धुएँ के साये में होंगे।(43)
Tafseer:
لَّا بَارِدࣲ وَلَا كَرِیمٍ ﴿٤٤﴾
जो न शीतल होगा और न देखने में अच्छी ही लगेगा।(44)
Tafseer:
إِنَّهُمۡ كَانُواْ قَبۡلَ ذَ ٰ⁠لِكَ مُتۡرَفِینَ ﴿٤٥﴾
निश्चय वे इससे पहले (दुनिया की) सुख-सुविधाओं का आनंद ले रहे थे।(45)
Tafseer:
وَكَانُواْ یُصِرُّونَ عَلَى ٱلۡحِنثِ ٱلۡعَظِیمِ ﴿٤٦﴾
तथा वे बड़े गुनाह पर अड़े रहते थे।(46)
Tafseer:
وَكَانُواْ یَقُولُونَ أَىِٕذَا مِتۡنَا وَكُنَّا تُرَابࣰا وَعِظَـٰمًا أَءِنَّا لَمَبۡعُوثُونَ ﴿٤٧﴾
और वे कहा करते थे कि क्या जब हम मर जाएँगे और हम मिट्टी तथा हड्डियाँ हो जाएँगे, तो क्या सचमुच हम अवश्य उठाए जाने वाले हैं?(47)
Tafseer:
أَوَءَابَاۤؤُنَا ٱلۡأَوَّلُونَ ﴿٤٨﴾
और क्या हमारे पहले बाप-दादा भी?(48)
Tafseer:
قُلۡ إِنَّ ٱلۡأَوَّلِینَ وَٱلۡـَٔاخِرِینَ ﴿٤٩﴾
आप कह दें : निःसंदेह अगले तथा पिछले (सभी) लोग।(49)
Tafseer:
لَمَجۡمُوعُونَ إِلَىٰ مِیقَـٰتِ یَوۡمࣲ مَّعۡلُومࣲ ﴿٥٠﴾
एक ज्ञात दिन के निश्चित समय पर अवश्य एकत्र किए जाने वाले हैं।(50)
Tafseer:
ثُمَّ إِنَّكُمۡ أَیُّهَا ٱلضَّاۤلُّونَ ٱلۡمُكَذِّبُونَ ﴿٥١﴾
फिर निःसंदेह तुम ऐ गुमराहो! झुठलाने वालो!(51)
Tafseer:
لَـَٔاكِلُونَ مِن شَجَرࣲ مِّن زَقُّومࣲ ﴿٥٢﴾
निश्चय ही ज़क़्क़ूम (थूहड़) के वृक्ष में से खाने वाले हो।[5]
5. (देखिए : सूरह साफ़्फ़ात, आयत : 62)
(52)
Tafseer:
فَمَالِـُٔونَ مِنۡهَا ٱلۡبُطُونَ ﴿٥٣﴾
फिर उससे अपने पेट भरने वाले हो।(53)
Tafseer:
فَشَـٰرِبُونَ عَلَیۡهِ مِنَ ٱلۡحَمِیمِ ﴿٥٤﴾
फिर उसपर खौलते पानी से पीने वाले हो।(54)
Tafseer:
فَشَـٰرِبُونَ شُرۡبَ ٱلۡهِیمِ ﴿٥٥﴾
फिर पीने वाले हो प्यास की बीमारी वाले ऊँट[6] के समान।
6. यह ऊँट में एक विशेष रोग होता है जिससे उसकी प्यास नहीं जाती।
(55)
Tafseer:
هَـٰذَا نُزُلُهُمۡ یَوۡمَ ٱلدِّینِ ﴿٥٦﴾
यह बदले के दिन उनकी मेहमाननवाज़ी है।(56)
Tafseer:
نَحۡنُ خَلَقۡنَـٰكُمۡ فَلَوۡلَا تُصَدِّقُونَ ﴿٥٧﴾
हमने ही तुम्हें पैदा किया, फिर तुम (पुनः जीवित किए जाने को) क्यों सच नहीं मानते?(57)
Tafseer:
أَفَرَءَیۡتُم مَّا تُمۡنُونَ ﴿٥٨﴾
तो क्या तुमने उस वीर्य पर विचार किया, जो तुम टपकाते हो?(58)
Tafseer:
ءَأَنتُمۡ تَخۡلُقُونَهُۥۤ أَمۡ نَحۡنُ ٱلۡخَـٰلِقُونَ ﴿٥٩﴾
क्या तुम उसे पैदा करते हो, या हम ही पैदा करने वाले हैं?(59)
Tafseer:
نَحۡنُ قَدَّرۡنَا بَیۡنَكُمُ ٱلۡمَوۡتَ وَمَا نَحۡنُ بِمَسۡبُوقِینَ ﴿٦٠﴾
हम ही ने तुम्हारे बीच मृत्यु का समय निश्चित किया है और हम कदापि विवश नहीं हैं।(60)
Tafseer:
عَلَىٰۤ أَن نُّبَدِّلَ أَمۡثَـٰلَكُمۡ وَنُنشِئَكُمۡ فِی مَا لَا تَعۡلَمُونَ ﴿٦١﴾
कि हम तुम्हारे रूप को परिवर्तित कर दें और तुम्हें ऐसी शक्ल-सूरत में पैदा कर दें, जिसे तुम नहीं जानते।(61)
Tafseer:
وَلَقَدۡ عَلِمۡتُمُ ٱلنَّشۡأَةَ ٱلۡأُولَىٰ فَلَوۡلَا تَذَكَّرُونَ ﴿٦٢﴾
तथा निश्चय ही तुम पहली पैदाइश को जान चुके हो, फिर तुम नसीहत ग्रहण क्यों नहीं करते?(62)
Tafseer:
أَفَرَءَیۡتُم مَّا تَحۡرُثُونَ ﴿٦٣﴾
फिर क्या तुमने उसपर विचार किया जो कुछ तुम बोते हो?(63)
Tafseer:
ءَأَنتُمۡ تَزۡرَعُونَهُۥۤ أَمۡ نَحۡنُ ٱلزَّ ٰ⁠رِعُونَ ﴿٦٤﴾
क्या तुम उसे उगाते हो, या हम ही उगाने वाले हैं?(64)
Tafseer:
لَوۡ نَشَاۤءُ لَجَعَلۡنَـٰهُ حُطَـٰمࣰا فَظَلۡتُمۡ تَفَكَّهُونَ ﴿٦٥﴾
यदि हम चाहें, तो अवश्य उसे चूर-चूर कर दें, फिर तुम आश्चर्य करते रह जाओ।(65)
Tafseer:
إِنَّا لَمُغۡرَمُونَ ﴿٦٦﴾
कि निःसंदेह हमपर दाँड डाल दिया गया।(66)
Tafseer:
بَلۡ نَحۡنُ مَحۡرُومُونَ ﴿٦٧﴾
बल्कि हम वंचित हो गए हैं।(67)
Tafseer:
أَفَرَءَیۡتُمُ ٱلۡمَاۤءَ ٱلَّذِی تَشۡرَبُونَ ﴿٦٨﴾
फिर क्या तुमने उस पानी पर विचार किया, जो तुम पीते हो?(68)
Tafseer:
ءَأَنتُمۡ أَنزَلۡتُمُوهُ مِنَ ٱلۡمُزۡنِ أَمۡ نَحۡنُ ٱلۡمُنزِلُونَ ﴿٦٩﴾
क्या तुमने उसे बादल से उतारा है, या हम ही उतारने वाले हैं?(69)
Tafseer:
لَوۡ نَشَاۤءُ جَعَلۡنَـٰهُ أُجَاجࣰا فَلَوۡلَا تَشۡكُرُونَ ﴿٧٠﴾
यदि हम चाहें, तो उसे अत्यंत खारा बना दें, फिर तुम शुक्र अदा क्यों नहीं करते?(70)
Tafseer:
أَفَرَءَیۡتُمُ ٱلنَّارَ ٱلَّتِی تُورُونَ ﴿٧١﴾
फिर क्या तुमने उस आग पर विचार किया, जो तुम सुलगाते हो?(71)
Tafseer:
ءَأَنتُمۡ أَنشَأۡتُمۡ شَجَرَتَهَاۤ أَمۡ نَحۡنُ ٱلۡمُنشِـُٔونَ ﴿٧٢﴾
क्या तुमने उसके वृक्ष को पैदा किया है, या हम ही पैदा करने वाले हैं?(72)
Tafseer:
نَحۡنُ جَعَلۡنَـٰهَا تَذۡكِرَةࣰ وَمَتَـٰعࣰا لِّلۡمُقۡوِینَ ﴿٧٣﴾
हमने ही उसे यात्रियों के लिए एक नसीहत तथा लाभ का सामान बनाया है।(73)
Tafseer:
فَسَبِّحۡ بِٱسۡمِ رَبِّكَ ٱلۡعَظِیمِ ﴿٧٤﴾
अतः (ऐ नबी!) आप अपने महान पालनहार के नाम की तसबीह करें।(74)
Tafseer:
۞ فَلَاۤ أُقۡسِمُ بِمَوَ ٰ⁠قِعِ ٱلنُّجُومِ ﴿٧٥﴾
अतः नहीं! मैं सितारों के गिरने की जगहों की क़सम खाता हूँ!(75)
Tafseer:
وَإِنَّهُۥ لَقَسَمࣱ لَّوۡ تَعۡلَمُونَ عَظِیمٌ ﴿٧٦﴾
और निःसंदेह यह निश्चय ऐसी क़सम है कि यदि तुम जानो तो बहुत बड़ी है।(76)
Tafseer:
إِنَّهُۥ لَقُرۡءَانࣱ كَرِیمࣱ ﴿٧٧﴾
निःसंदेह, यह निश्चित रूप से एक प्रतिष्ठित क़ुरआन है।(77)
Tafseer:
فِی كِتَـٰبࣲ مَّكۡنُونࣲ ﴿٧٨﴾
एक छिपाकर रखी हुई[7] किताब में (अंकित) है।
7. इससे अभिप्राय 'लौह़े मह़फ़ूज़' है।
(78)
Tafseer:
لَّا یَمَسُّهُۥۤ إِلَّا ٱلۡمُطَهَّرُونَ ﴿٧٩﴾
इसे कोई नहीं छूता सिवाय उनके जो बहुत पवित्र किए गए हैं।[8]
8. इससे अभिप्राय फ़रिश्तें हैं। (देखिए : सूरत अबस, आयत : 15-16)
(79)
Tafseer:
تَنزِیلࣱ مِّن رَّبِّ ٱلۡعَـٰلَمِینَ ﴿٨٠﴾
यह सारे संसार के पालनहार की ओर से उतारा गया है।(80)
Tafseer:
أَفَبِهَـٰذَا ٱلۡحَدِیثِ أَنتُم مُّدۡهِنُونَ ﴿٨١﴾
फिर क्या तुम इस वाणी की उपेक्षा करने वाले हो?(81)
Tafseer:
وَتَجۡعَلُونَ رِزۡقَكُمۡ أَنَّكُمۡ تُكَذِّبُونَ ﴿٨٢﴾
तथा तुम (क़ुरआन से) अपना हिस्सा यह बनाते हो कि तुम (इसे) झुठलाते हो?(82)
Tafseer:
فَلَوۡلَاۤ إِذَا بَلَغَتِ ٱلۡحُلۡقُومَ ﴿٨٣﴾
फिर क्यों नहीं जब वह (प्राण) गले को पहुँच जाता है।(83)
Tafseer:
وَأَنتُمۡ حِینَىِٕذࣲ تَنظُرُونَ ﴿٨٤﴾
और तुम उस समय देख रहे होते हो।(84)
Tafseer:
وَنَحۡنُ أَقۡرَبُ إِلَیۡهِ مِنكُمۡ وَلَـٰكِن لَّا تُبۡصِرُونَ ﴿٨٥﴾
तथा हम तुमसे अधिक उसके निकट होते हैं, परंतु तुम नहीं देखते।(85)
Tafseer:
فَلَوۡلَاۤ إِن كُنتُمۡ غَیۡرَ مَدِینِینَ ﴿٨٦﴾
तो अगर तुम (किसी के) अधीन नहीं हैं तो क्यों नहीं।(86)
Tafseer:
تَرۡجِعُونَهَاۤ إِن كُنتُمۡ صَـٰدِقِینَ ﴿٨٧﴾
तुम उसे वापस ले आते, यदि तुम सच्चे हो?(87)
Tafseer:
فَأَمَّاۤ إِن كَانَ مِنَ ٱلۡمُقَرَّبِینَ ﴿٨٨﴾
फिर यदि वह निकटवर्तियों में से है।(88)
Tafseer:
فَرَوۡحࣱ وَرَیۡحَانࣱ وَجَنَّتُ نَعِیمࣲ ﴿٨٩﴾
तो उसके लिए आराम और अच्छी जीविका और नेमतों से भरी जन्नत है।(89)
Tafseer:
وَأَمَّاۤ إِن كَانَ مِنۡ أَصۡحَـٰبِ ٱلۡیَمِینِ ﴿٩٠﴾
और यदि वह दाहिने हाथ वालों में से है।(90)
Tafseer:
فَسَلَـٰمࣱ لَّكَ مِنۡ أَصۡحَـٰبِ ٱلۡیَمِینِ ﴿٩١﴾
तो (कहा जाएगा) तेरे लिए सलामती है (कि तू) दाहिने हाथ वालों में से है।(91)
Tafseer:
وَأَمَّاۤ إِن كَانَ مِنَ ٱلۡمُكَذِّبِینَ ٱلضَّاۤلِّینَ ﴿٩٢﴾
और यदि वह व्यक्ति झुठलाने वाले गुमराहों में से है,(92)
Tafseer:
فَنُزُلࣱ مِّنۡ حَمِیمࣲ ﴿٩٣﴾
तो उसके लिए खौलते हुए पानी का अतिथि सत्कार है।(93)
Tafseer:
وَتَصۡلِیَةُ جَحِیمٍ ﴿٩٤﴾
तथा जहन्नम की आग में जलना है।(94)
Tafseer:
إِنَّ هَـٰذَا لَهُوَ حَقُّ ٱلۡیَقِینِ ﴿٩٥﴾
निःसंदेह यक़ीनन यही है वह सत्य जो निश्चित है।(95)
Tafseer:
فَسَبِّحۡ بِٱسۡمِ رَبِّكَ ٱلۡعَظِیمِ ﴿٩٦﴾
अतः आप अपने महान पालनहार के नाम की महिमा करें।(96)
Tafseer: